द्वीपीय देश मारावेल की राजधानी में चल रहे अंतरराष्ट्रीय मसाला मेले में इस बार नौ भारतीय किसान उत्पादक कंपनियों ने पहली बार अपने स्टॉल लगाए हैं। आयोजकों के मुताबिक़ मेले के पहले दिन इन कंपनियों और विदेशी ख़रीदारों के बीच 40 छोटे-बड़े सौदों पर सहमति बनी।
ये कंपनियां हल्दी, इलायची, काली मिर्च, जीरा और सूखी अदरक लेकर पहुंची हैं। इनके सदस्य छोटे किसान हैं, जो आम तौर पर बिचौलियों के ज़रिए अपनी फ़सल बेचते हैं।
एक कंपनी की निदेशक लता पिल्लै ने बताया, "पहली बार हमने ख़रीदार से आमने-सामने बात की। उन्हें यह जानना था कि मसाला किस खेत से आया, कैसे सुखाया गया और जांच कहां हुई।"
ख़रीदारों की मांग
- जैविक और कीटनाशक-मुक्त होने के प्रमाणपत्र।
- हर खेप के साथ प्रयोगशाला जांच की रिपोर्ट।
- छोटे पैकेट में ब्रांडेड पैकिंग, ताकि सीधे दुकानों में बिक सकें।
- डिलीवरी की तय और भरोसेमंद समय सीमा।
मेले में शामिल व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती लगातार एक जैसी गुणवत्ता बनाए रखना है। कई कंपनियां अब साझा गोदाम और जांच सुविधा पर बात कर रही हैं।
मेला रविवार तक चलेगा। आयोजकों ने अगले साल भारतीय किसान कंपनियों के लिए अलग मंडप बनाने की बात कही है।










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