अमरौली की ज़िला लाइब्रेरी के एक कमरे में हर शनिवार सुबह एक अलग तरह की क्लास लगती है। यहां छात्र 60 साल से ज़्यादा उम्र के हैं और शिक्षक कॉलेज में पढ़ने वाले युवा। विषय है स्मार्टफ़ोन।
इस क्लास की शुरुआत एक साल पहले कंप्यूटर साइंस की छात्रा प्रियंका सिंह ने की थी, जब उन्होंने देखा कि उनकी दादी वीडियो कॉल उठाने के लिए भी पड़ोसियों को बुलाती थीं। अब तक करीब 300 बुज़ुर्ग चार हफ़्ते का यह कोर्स पूरा कर चुके हैं।
72 साल के सेवानिवृत्त शिक्षक हरिशंकर पांडेय ने बताया, "पहले फ़ोन छूने से डर लगता था कि कुछ ख़राब न हो जाए। अब मैं अपने पोते को विदेश में वीडियो कॉल करता हूं और बिजली का बिल भी फ़ोन से भरता हूं।"
चार हफ़्ते में क्या सिखाया जाता है
- पहला हफ़्ता: फ़ोन चालू करना, अक्षर बड़े करना, कॉल और संपर्क सहेजना।
- दूसरा हफ़्ता: वीडियो कॉल, फ़ोटो भेजना और वॉइस मैसेज।
- तीसरा हफ़्ता: ऑनलाइन भुगतान और बिल भरना।
- चौथा हफ़्ता: ठगी से बचाव, यानी ओटीपी, फ़र्ज़ी कॉल और संदिग्ध लिंक की पहचान।
प्रियंका कहती हैं कि चौथा हफ़्ता सबसे ज़रूरी है। "बुज़ुर्गों को सबसे ज़्यादा निशाना बनाया जाता है। हम उन्हें एक ही नियम रटवाते हैं: कोई ओटीपी मांगे तो फ़ोन काट दो।"
लाइब्रेरी ने अब इस क्लास को हफ़्ते में दो दिन करने का फ़ैसला किया है, क्योंकि प्रतीक्षा सूची में 150 से ज़्यादा नाम हैं।











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