सेवली गांव का पुराना तालाब सालों से सूखा पड़ा था। उसमें गाद भर गई थी, मेड़ टूटी हुई थी और बारिश का पानी कुछ ही दिनों में बह जाता था। इस मानसून के बाद तालाब पानी से भरा है और गांव के बुज़ुर्ग कहते हैं कि ऐसा नज़ारा उन्होंने दो दशक बाद देखा है।
यह बदलाव गर्मियों में हुए श्रमदान का नतीजा है। मई और जून में हर रविवार गांव के 400 से ज़्यादा लोगों ने तालाब से गाद निकाली, मेड़ ऊंची और मज़बूत की और पहाड़ी से आने वाले पानी के रास्ते साफ़ किए। निकली हुई उपजाऊ गाद किसानों ने अपने खेतों में डाली।
गांव की जल समिति के सदस्य मोहनलाल जाट ने बताया, "किसी ने मज़दूरी नहीं ली। जिसके पास ट्रैक्टर था, उसने ट्रैक्टर दिया। जिसके पास कुछ नहीं था, उसने फावड़ा उठाया।"
गांव को क्या मिला
- तालाब के पास के आठ कुओं का जलस्तर पिछले साल से कई फ़ुट ऊपर है।
- मवेशियों के लिए पूरे साल पानी मिलने की उम्मीद है।
- गाद डालने से खेतों की मिट्टी बेहतर हुई है।
जल समिति ने तालाब के इस्तेमाल के नियम भी बनाए हैं: तालाब में कचरा डालना और उसके किनारे से मिट्टी निकालना मना है। हर साल गर्मियों में एक दिन सफ़ाई के लिए तय किया गया है।
पड़ोसी गांवों के लोग भी तालाब देखने आ रहे हैं, और दो गांवों ने अगली गर्मियों में ऐसा ही काम करने का फ़ैसला किया है।









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