ज़िला प्रशासन ने गुरुवार को एक पायलट योजना की घोषणा की, जिसके तहत केसरगंज ज़िले की ग्राम पंचायतों को अपना बजट खुली बैठक में पढ़कर सुनाना होगा और उसका एक पन्ने का सार सार्वजनिक दीवार पर लिखवाना होगा।
यह आदेश ज़िले की सभी 212 ग्राम पंचायतों पर लागू होगा। हर पंचायत को अगले महीने के अंत से पहले ग्राम सभा बुलाकर बताना होगा कि उसे कितनी राशि मिलने की उम्मीद है, कौन-से काम होंगे और हर काम पर कितना ख़र्च आएगा।
ज़िलाधिकारी अनीता देशमुख ने कहा, "लोगों को यह जानने के लिए दफ़्तर के चक्कर नहीं लगाने चाहिए कि उनकी अपनी गली में क्या बन रहा है। योजना गांव की चौपाल में पढ़ी जाएगी तो ग़लतियां पैसा ख़र्च होने से पहले ही पकड़ में आ जाएंगी।"
गांव वालों के लिए क्या बदलेगा
- सूचना के साथ खुली बैठक। तारीख़ कम से कम सात दिन पहले ढोल, लाउडस्पीकर और गांव के ग्रुप पर संदेश से बतानी होगी।
- दीवार पर बोर्ड। बजट का सार, हर काम और उसकी लागत के साथ, पूरे साल प्रदर्शित रहेगा।
- आपत्तियां दर्ज होंगी। कोई भी ग्रामीण बैठक में किसी काम पर आपत्ति कर सकता है; आपत्ति और पंचायत का जवाब कार्यवाही में लिखा जाएगा।
- हर तिमाही प्रगति की जानकारी, अगली ग्राम सभा में पढ़कर सुनाई जाएगी।
अभी क्यों
अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल ज़िला कार्यालय को मिली ज़्यादातर शिकायतें उन सड़कों और नालियों को लेकर थीं, जिनके बारे में लोगों को काम शुरू होने तक पता ही नहीं था। जिन तीन ब्लॉकों में ऐसा तरीक़ा अनौपचारिक रूप से अपनाया गया, वहां शिकायतें आधी से भी कम रह गईं।
कुछ सरपंचों ने इस क़दम का स्वागत किया है, लेकिन मदद भी मांगी है। रामपुर खुर्द की सरपंच कमला देवी ने कहा, "हम ख़ुशी से पढ़कर सुनाएंगे, लेकिन ऐसा सार बनाने में लेखा कर्मचारियों की मदद चाहिए जिसे हर कोई समझ सके।"
ज़िला अगले दो हफ़्तों में पंचायत सचिवों को प्रशिक्षण देगा और छह महीने बाद पायलट की समीक्षा करेगा।




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